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वायु प्रदूषण रोकने के अब तक के उपाय

iqfunda 0

भारत में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में न्यायपालिका द्वारा महत्त्वपूर्ण पहल की गई है । जीवन का अधिकार, जिसका उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 21 में है , की सकारात्मक व्याख्या करके न्यायपालिका ने जीवन के अधिकार में ही स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को निहित बताया है। न्यायपालिका ने विभिन्न मामलों में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया है कि गुणवत्तापूर्ण जीवन को यह मूल आवश्यकता है कि मानव स्वच्छ पर्यावरण में जीवन व्यतीत करे।

हालाँकि अधिकांश मामलों में न्यायपालिका का विचार रहा है कि विकास के महत्त्व को गौण स्थान नहीं दिया जा सकता परंतु पर्यावरण की कीमत पर विकास को तवज्जो नहीं दी जा सकती। प्रदूषण की गंभीर समस्या पर दुनिया का ध्यान पहली बार तब केंद्रित हुआ जब स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 5 – 10 जून , 1972 के प्रथम संयुक्त राष्ट्र सार्वभौमिक पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन हुआ और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की विधिवत् स्थापना हुई। प्रतिवर्ष 5 जून को ‘ पर्यावरण दिवस ‘ के रूप में मनाए जाने का निर्णय हुआ। इस दिशा में भारत की गंभीरता और जागरूकता का पता ‘ धरती संरक्षण कोश ‘ के उस व्यापक प्रस्ताव से चलता है जो उसने बेलग्रेड गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन और कुआलालमपुर राष्ट्रमंडल सम्मेलन में रखा, जहाँ इसे व्यापक समर्थन मिला। देश में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये वायु (प्रदूषण एवं नियंत्रण) अधिनियम , प्रदूषण एव नियत्रण ) आधनियम , 1981 बनाया गया । इस अधिनियम के पारित होने के पीछे जून 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन की प्रमुख भूमिका रही । इस अधिनियम में मुख्यतः मोटरगाड़ियों और कारखानों से निकलने वाले धुंए और गंदगी का स्तर निर्धारित करने तथा उसे नियंत्रित करने का प्रावधान किया गया है। 1987 में इस अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण को भी शामिल किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ही वायु प्रदूषण अधिनियम लागू करने का अधिकार दिया गया है। इस अधिनियम के पैरा – 19 के तहत केंद्रीय बोर्ड को मुख्यतः राज्य बोर्ड के काम में तालमेल स्थापित करने के अधिकार दिये गए हैं । राज्यों के बोर्ड से परामर्श करके संबंधित राज्य सरकार किसी भी क्षेत्र को वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर सकती है । साथ ही , वहाँ स्वीकृत ईंधन के अतिरिक्त अन्य किसी भी प्रकार के प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन के प्रयोग पर रोक लगा सकती है । इसके अलावा , इस अधिनियम में यह प्रावधान भी किया गया है कि कोई भी व्यक्ति राज्य बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र में ऐसी कोई भी औद्योगिक इकाई शुरू नहीं कर सकता जिसका वायु प्रदूषण अनुसूची में उल्लेख नहीं है। इसके अतिरिक्त , यह अधिनियम केंद्र व राज्य सरकारों को वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिये अनेक महत्त्वपूर्ण अधिकार भी देता है। इसके साथ ही , एनजीटी द्वारा सभी वाणिज्यिक वाहनों पर दिल्ली में प्रवेश पर पर्यावरण तथा एनजीटी द्वारा ही पर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों को डीजल वाहनों की खरीद न करने को कहा गया। दिल्ली सरकार द्वारा ऑड – ईवन प्रणाली भी कुछ दिनों के लिये लागू की गई तथा नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (NEMMP) जैसी योजनाओं की शुरुआत हुई। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण हितैषी एवं उच्च क्षमता वाले हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण करना है जिससे 2020 तक co , उत्सर्जन में 1 . 5 प्रतिशत तक कमी लाई जा सके । इसके साथ ही भारत में वायु की गुणवत्ता की जाँच करने वाली पहली मोबाइल एप सेवा ‘ सफर ‘ ( System of Air Quality of Weather Forecasting and Research ) तैयार की गई । यह एप्लीकेशन कलरकोडेड प्रणाली के माध्यम से वर्तमान डेटा और वायु प्रदूषण बताएगा। देश के बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने और जरूरी कार्रवाई करने के लिये तथा जन जागरूकता में वृद्धि लाने के लिये राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही , भारत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा देशव्यापी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NAMP) का कार्यान्वयन किया जा रहा है । राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम चार प्रदूषकों so. NO. SPM तथा RSPM / PMIO पर नियमित निगरानी रखता है। भारत ने जुलाई, 2010 से कार्बन कर को लागू कर दिया है। वर्तमान मानक के अनुसार प्रति मीटिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन परकर स्वरूप संबंधित कंपनियों को अदा करना पड़ता है। भारत कार्बन कर को स्वविवेक पहल प्रक्रिया और पर्यावरण पर राष्ट्रीय कार्ययोजना के क्रियान्वयन हेतु दायित्वबोध से प्रेरित होकर कर रहा है। हालांकि, भारत ने कार्बन कर को पर्यावरण परिवर्तन की आड़ में बाध्यकारी संहिता बनाने की विकसित राष्ट्रों की मंशा का विरोध भी किया है।

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