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बैंकों के विलय से क्या फायदे हो सकते हैं?

iqfunda 0

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था है । इस रुतबे को बनाए रखने के लिये जरूरी है कि अर्थव्यवस्था में पंजी निर्माण की दर उच्च हो । यहाँ यह समझ लेना ज़रूरी है कि किसी भी अर्थव्यवस्था में बचत सजन (Generating Savings) , बचत संग्रहण ( Accumulation of Savings ) तथा उत्पादन क्षेत्र में बचत के निवेश (Investment of Savings) की समग्र प्रक्रिया को पूंजी निर्माण कहा जाता है। किसी भी देश में आर्थिक विकास को निर्धारित करने वाले कारकों में पूंजी निर्माण की दर सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण होती है।

हम यह जानते हैं कि पूंजी निर्माण की प्रक्रिया में देश में काम कर रही वित्त प्रणाली की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण होती है और बैंकिंग व्यवस्था वित्त प्रणाली की रीढ़ मानी जाती है। इस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए अब अगर विभिन्न बैंकों के विलय द्वारा कुछ विशाल बैंकों की स्थापना के फायदे की बात करें तो इसका सर्वप्रमुख लाभ यह है कि विलय पश्चात् इन विशाल बैंकों की पंजी दक्षता एवं परिसंपत्ति में वृद्धि होगी और बैंक की कोष लागत एवं परिचालन लागत घटेगी। बैंकों की पूंजी दक्षता में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ अर्थव्यवस्था के अंदर वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ अर्थव्यवस्था के अंदर सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत ढाँचे में निवेश के रूप में देखने को मिलेगा और यदि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था की अपनी पहचान को बचाए रखना है तो आधारभूत ढाँचे में अधिक – से – अधिक निवेश किया जाना अनिवार्य है साथ ही , पूंजी दक्षता में होने वाली वृद्धि इस समय बैंकिंग तंत्र के सम्मुख खड़े गैर – निष्पादनकारी परिसंपत्तियों (NPA’s) के संकट का कुछ हद तक समाधान प्रस्तुत कर सकती है ।

खासकर ऐसे बैंक जो एन . पी . ए . की समस्या के कारण पूंजी अभाव का सामना कर रहे हैं उनके लिये विलय पश्चात् बैंक की पूंजी दक्षता में होने वाली वृद्धि रामबाण साबित होगी। बैंकों के विलय का दूसरा बड़ा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ दिनोंदिन बढ़ती जा रही गतिविधियों से संबंधित है। वर्तमान में भारत की कई कंपनियों (सार्वजनिक व निजी क्षेत्र दोनों की) ने भारत के बाहर भी अपने कारोबार को विस्तार दिया है, कई विदेशी कंपनियों का भारतीय कंपनियों ने अधिग्रहण किया है और कई वैश्विक परियोजनाओं में भारतीयों ने निवेश किया है। ऐसी स्थिति में भारतीय वित्तीय तंत्र में ऐसे विशाल बैंकों की मौजूदगी बहुत आवश्यक है जो इन गतिविधियों को वित्तीय सेवाएं दे सकें। ऐसा न होने की स्थिति में भारतीय निवेशकों और कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना एवं करने में मुसीबत होगी।बैंकों के विलय से तीसरा बड़ा फायदा बैंकों की क्षमता एवं कार्यप्रणाली में आने वाले अंतर बैंकों से जुड़ा हुआ है। इसके तहत प्रथम बिंदु तो यह है है कि विलय के उपरांत बैंक अंतर्राष्ट्रीय मानकों बैंकों की ओर अग्रसर होंगे और आधुनिकीकरण एवं स्तर नवाचार पर ज्यादा जोर देंगे। द्वितीय बात यह है कि इससे बैंक अपनी सेवाओं के अधिकाधिक भौगोलिक विस्तार पर ध्यान देंगे तथा ज्यादा – से – ज्यादा लोगों तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करेंगे। तृतीय बिंदु है कि विलय पश्चात् पूंजी उपलब्धता में वृद्धि होने से बैंक तकनीकी उन्नयन पर पहले से अधिक निवेश कर सकेंगे और जिस अनुपात में बैंक की तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी उसी अनुपात में बैंक की परिचालन लागत में कमी आएगी ; यानी कुल मिलाकर बैंकिंग क्षेत्र में ‘ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ‘ का लक्ष्य हासिल करना आसान होगा । चतुर्थ बिंदु की अगर बात करें तो बैंकों के विलय से बैंकों की व्यावसायिक क्षमता और तरलता में अच्छी – खासी वद्धि होगी जिसका प्रत्यक्ष लाभ यह होगा कि बैंक ग्राहकों को अधिकाधिक गुणवत्तापूर्ण एवं सुविधाजनक वित्तीय उत्पाद एवं सेवाएँ प्रदान कर पाने में सक्षम होंगे और यदि ऐसा होता है तो हमें बैंकिंग क्षेत्र में प्रभावकारी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। इस क्रम में पाँचवा बिंदु यह होगा कि बैंकों का विलय करने से अभी विभिन्न बैंकों के बीच चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा का समापन हो जाएगा जिससे बैंक खुद को बेहतर वित्तीय सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित कर सकेंगे। बैंकों के विलय का छठा बड़ा फायदा बैंकों के उच्चाधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़ा है । अभी देश में कार्यरत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मुख्य प्रबंधन अधिकारी से लेकर जोनल मैनेजर तक के पदों पर उच्चाधिकारियों को पूरी श्रृंखला पदासीन है । बैंकों का विलय इस श्रृंखला को सीमित कर देगा जिससे बैंकों की मौद्रिक बचत तो होगी ही साथ ही उच्चाधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप से भी मुक्ति मिलेगी। कर्मचारियों को अगर बात करें तो विलय उनके लिये फायदे का सौदा साबित होगा क्योंकि विलय उपरांत उनकी संगठन क्षमता , कुशलता , कार्यसंस्कृति , सुविधाओं आदि में लाभकारी परिवर्तन होगा। साथ ही , वे अपने वेतन , भत्तों एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में पहले से बेहतर ढंग से मोलभाव कर सकेंगे। बैंकों के विलय से सातवाँ बड़ा फायदा बैंकों के नियमन और उन पर नियंत्रण से संबंधित है। इसमें कोई संदेह की बात नहीं है कि यदि बैंकों की संख्या कम होगी तो उनकी सक्ष्मतम स्तर पर निगरानी एव नियमन हो सकेगा और उन पर आवश्यक प्रभावकारी नियंत्रण भी स्थापित किया जा सकेगा ।

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