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गांधी की चंपारण यात्रा

iqfunda 0

गांधी के चंपारण पहुँचने से पहले ही उनकी कीर्ति वहाँ पहुँच चुकी थी । जनमानस में बनने वाली छवि अहिंसक लड़ाई का बड़ा प्रभावी हथियार होती है । दक्षिण अफ्रीका में गांधी ने क्या किया , इसे न जानने वाले भी यह जान गए कि यह चमत्कारी आदमी है । रास्ते भर किसान ही नहीं , सरकारी अधिकारी भी गांधी को देखने आते रहे । जितने लोग आते – जाते , बातें भी उतने ही रंग की फैलती जातीं । अंग्रेज अधिकारी और प्रशासन हैरान थे कि यह आदमी करना क्या चाहता है और यह जो करना चाहता है अगर वह इसे करने दिया जाए तो पता नहीं यह क्या – क्या करने लग जाएगा। दक्षिण अफ्रीका में बस के जाल में इसी तरह जा फंसे थे , वह कहानी गई गांधी के लोगों से ज्यादा अच्छी तरह सरकारी वकील लोगों को पता थी । अगला नज़ारा कचहरी में खुला। बात सारे चंपारण में फैल गई थी कि अब गांधीजी का चमत्कार होगा। कचहरी में किसानों का रेला उमड़ पड़ा था। सरकारी वकील पूरी तैयारी से आये थे कि इस विदेशी वकील को धूल चटा देगा। जज ने पूछा कि गांधी साहब आपका वकील कौन है तो गांधीजी ने जवाब दिया , कोई भी नहीं। फिर? गांधी बोले , ” मैंने जिलाधिकारी के नोटिस का जवाब भेज दिया है । ” अदालत में सन्नाटा खिंच गया। जज बोला , ” वह जवाब अदालत में पहुँचा नहीं है । ” गांधीजी ने अपने जवाब का कागज़ निकाला और पढ़ना शुरू कर दिया । कचहरी में इतनासन्नाटा था कि गांधीजी के हाथ की सरसराहट तक सुनाई दे रही थी । उन्होंने कहा कि अपने देश में कहीं भी आने – जाने और काम करने की आजादी पर वे कैसी भी बंदिश कबूल नहीं करेंगे । हाँ , जिलाधिकारी के ऐसे आदेश को न मानने का अपराध में स्वीकार करता हूँ और उसके लिये सजा की मांग भी करता हूँ । गांधीजी का लिखा जवाब पूरा हुआ तथा इस खेमे में और उस खेमे में सारा कुछ उलट – पुलट गया । न्यायालय ने ऐसा अपराधी नहीं देखा था जो बचने की कोशिश ही नहीं कर रहा था । देशी – विदेशी सारे वकीलों के लिये यह हैरतअंगेज था कि यह आदमी अपने लिये सजा की मांग कर रहा है जबकि कानूनी आधार पर सजा का कोई मामला बनता ही नहीं है । सरकार , प्रशासन सभी अपने ही बुने उनकी जाल में उलझते जा रहे थे । जज ने कहा कि जमानत ले लो तो जवाब मिला , “ मेरे पास जमानत भरने के पैसे नहीं हैं । ” जज ने फिर कहा , ” बस इतना कह दो कि तुम जिला छोड़ दोगे और फिर यहाँ नहीं आओगे तो हम मुकदमा बंद कर देंगे । ” गांधीजी ने कहा , ” यह कैसे हो सकता है । आपने जेल दी तो उससे छूटने के बाद में स्थायी रूप से यही चंपारण में अपना घर बना लूगा । ” कुछ समय तक यह सब चला और फिर कहीं दिल्ली से निर्देश आया कि इस आदमी से उलझो मत , मामले को आगे मत बढ़ाओ और गांधी को अपना काम करने दो । बस , यह सरकारी आदेश ही वह कुंजी बन गई , जिससे सत्याग्रह का ताला खुलता है । सारे वकील , प्रोफेसर , युवा , किसान – मजदूर सब खिचते चले आए और जितने करीब आए उतने ही बदले ।गांधी सबसे वादा भी लेते हैं कि जेल जाने की घड़ी आएगी तो कोई पीछे नहीं हटेगा । इन नामी वकीलों ने अब तक दूसरों को जेल भिजवाने का या जेल जाने से बचाने का ही काम किया था , खुद जेल जाने की तो कल्पना भी नहीं की थी । जेल जाना बदनामी की बात भी थी । गांधी सबको समझा रहे थे कि सच की लड़ाई में जेल जाना केवल सम्मान की ही बात नहीं है बल्कि ज़रूरी बात भी है । और जब वे यह कह रहे थो यहूदियों तो सभी जानते थे कि वे खुद दक्षिण अफ्रीका गांधीवादी की जेलों में रहकर और जीतकर आए हैं । किसानों से बयान दर्ज करवाने का काम किसी युद्ध की तैयारी जैसा चला । देशभर से आए विभिन्न भाषाओं के लोग , बिहार के लोगों की मदद से बयान दर्ज कराने के काम में जुटे । गांधी जैसे एक वकालतखाना ही चला रहे हों । तथ्यों का सच्चा और संपूर्ण आकलन कैसे एक अकाट्य हथियार बन गया , ‘ डेटा कलेक्शन ‘ की आज की पेशेवर दुनिया में चंपारण इसका ‘ पदार्थ – पाठ ‘ बन सकता है । गांधी यह भी पहचान गए थे कि नील की खेती के पीछे अंग्रेजों की दमनकारी नीतियाँ तो हैं ही , नकदी फसल की तरफ किसानों का आकर्षण भी है । इस लोभ में वे अपनी कृषि – प्रकृति के खिलाफ जाकर काम करने को तैयार हो रहे हैं । आज खेती का सबसे बड़ा संकट यह है कि प्रकृति के साथ रासायनिक युद्ध में बदल दिया है जबकि खेती तो शरीर – विज्ञान है । चंपारण सत्याग्रह का यह पहलू बहुत उभरा नहीं क्योंकि मैदान में लड़ाई कुछ और ही चल रही थी । लेकिन चंपारण के काम की दिशा का जब विस्तार हुआ और गांधी का सत्याग्रह पूरी तरह खिला तब गांधी इन सारे सवालों को छूने में कामयाब हुए । आज हमारी खेती – किसानी जब लाचारी और आत्महत्या का दूसरा नाम बन गई है , हमें चंपारण सत्याग्रह की इस दिशा का ध्यान करना चाहिये । गांधी और चंपारण दोनों ही आज के हिंदुस्तान की दशा सुधारने और दिशा दिखाने का काम एक साथ कर सकते हैं । शर्त इतनी ही है कि हम कृषि की दशा सुधारने और दिशा खोजने के बारे में ईमानदार हों।

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