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दाण्डीमार्च(12 मार्च – 6 अप्रैल, 1930)

iqfunda 0

गाँधीजी ने 12 मार्च , 1930 को ऐतिहासिक पदयात्रा प्रारम्भ की 24 दिनों के पश्चात् यह पदयात्रा 240 मील (375 किमी.) चलकर 5 अप्रैल को डाण्डी पहुँची। 6 अप्रैल को गाँधीजी ने नमक बनाकर कानून तोड़ा। इसके पश्चात् पूरे देश में नमक सत्याग्रह शुरू हो गया। सुभाषचन्द्र बोस ने गाँधीजी के डाण्डी मार्च की तुलना नेपोलियन के पेरिस मार्च तथा मुसोलिनी के रोम मार्च से की। 4 मई , 1930 को गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया ।आन्दोलन का प्रसार गांधीजी की गिरफ्तारी की प्रतिक्रिया स्वरूप देश में हर जगह हड़तालों , प्रदर्शनों का आयोजन होने लगा। देश के अनेक भागों में किसानों ने जमीन की मालगुजारी और लगान देने से इनकार कर दिया। देखते ही देखते इस विरोध ने जनआंदोलन का रूप ले लिया। पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त में खान अब्दुल गफ्फार खाँ ने कांग्रेस तथा गाँधीजी के नेतृत्व को स्वीकार किया और पठानां के स्वभाव के विपरीत उन्हें अहिंसा के रास्ते पर चलने की सलाह दी। धरासणा में नमक सत्याग्रह का नेतृत्व सरोजिनी नायडू , इमाम साहब , गाँधीजी के पुत्र मणिलाल ने किया। 21 मई , 1930 को 2000 आन्दोलनकारियों के साथ इन्होंने धरासणा नामक कारखाने पर धावा बोल दिया। यहाँ पर पुलिस ने आन्दोलनकारियों का बहुत क्रूरता से दमन किया। मणिपुर में आन्दोलन का नेतृत्व नागा महिला गैडिनेल्यू ने किया। गैडिनेल्यू ने ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष किया, लेनिक वर्ष 1932 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया आजीवन कैद की सजा सुनाई गई। बंगाल में चौकीदारी एवं यूनियन बोर्ड विरोधी आन्दोलन चलाया गया। महाराष्ट्र , मध्य प्रान्त एवं कर्नाटक में कड़े वन – नियमों के विरुद्ध सत्याग्रह चलाया गया। तमिलनाडु के तंजौर तट पर सी . राजगोपालाचारी ने त्रिचनापल्ली से वेदारण्यम तक की यात्रा की , मालाबार में के . कल्प्पन ने कालीकट से पोयान्नूर की यात्रा की।

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